ईरान ने अमेरिका के डेटा केंद्रों पर हमले की दी चेतावनी

ईरान के सुरक्षा प्रमुख ने हमले की स्थिति में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने की बात कही।

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Aapla Nagpur Desk
22 Oct 2026, 3:06 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Moneycontrol
ईरान ने अमेरिका के डेटा केंद्रों पर हमले की दी चेतावनी
खास बातें
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ईरान ने हमले की स्थिति में अमेरिकी डेटा केंद्रों और एआई सुविधाओं को निशाना बनाने की योजना बनाई है।

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अमेरिका और इज़राइल चुनावों के बाद नए हमलों की तैयारी कर रहे हैं।

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ईरान ने पिछले संघर्षों में अपनी सैन्य क्षमताओं का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया है।

ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इज़राइल उसके क्षेत्र पर नए हमले करते हैं, तो वह अमेरिकी डेटा केंद्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुविधाओं को निशाना बनाएगा। यह घोषणा ईरान के सुरक्षा प्रमुख जनरल मोहसिन रेजाई द्वारा की गई, जिन्होंने कहा कि तेहरान के पास मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से विभिन्न अमेरिकी संपत्तियों पर हमला करने की क्षमता है।

यह चेतावनी उस समय आई है जब अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव बढ़ रहा है, और रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि दोनों देश आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद नए सैन्य हमलों की योजना बना रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण होगा और बातचीत को अस्वीकार कर दिया।

रेजाई ने कहा कि जबकि ईरान एक कूटनीतिक समाधान की ओर अग्रसर है, लेकिन यदि संघर्ष फिर से शुरू होता है, तो उसके पास जवाब देने के लिए सभी साधन हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई का एक बड़ा मूल्य होगा और यह भी कहा कि ईरान ने पहले कुछ सैन्य क्षमताओं को रोक रखा था।

इन घटनाक्रमों के व्यापक प्रभाव हैं, क्योंकि यह क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को बढ़ाने का संकेत देता है। एक ईरानी अधिकारी ने दावा किया है कि इज़राइल के चुनावों से पहले बड़े पैमाने पर बमबारी हो सकती है, जिससे मानवीय प्रभाव और क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा, अमेरिका और इज़राइल की सैन्य गतिविधियों में इराक में वृद्धि हुई है, जो ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों की तैयारी को दर्शाता है।

आगे देखते हुए, स्थिति नाजुक बनी हुई है, और दोनों पक्ष संभावित संघर्ष के लिए तैयार हैं। अमेरिका और इज़राइल के चुनावों के नतीजे सैन्य कार्रवाई के लिए उत्प्रेरक बन सकते हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखे हुए है। संघर्षों के नवीनीकरण की संभावना कूटनीतिक संबंधों के भविष्य और ईरान पर आर्थिक दबाव के बढ़ने के सवाल उठाती है।

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