महाराष्ट्र 2030 तक एनीमिया दर को आधा करने की योजना
महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं और किशोरों में एनीमिया को कम करने के लिए अभियान शुरू किया है।
54% प्रजनन आयु की महिलाएं और 57% किशोर एनीमिया से प्रभावित हैं।
‘एनीमिया-मुक्त महाराष्ट्र’ अभियान स्क्रीनिंग और पोषण पर केंद्रित होगा।
आयरन की कमी एनीमिया के मामलों का प्रमुख कारण है।
महाराष्ट्र सरकार ने 'एनीमिया-मुक्त महाराष्ट्र' अभियान की शुरुआत की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2030 तक एनीमिया की प्रचलन दर को 50% तक कम करना है। यह घोषणा सोमवार को की गई, जिसमें यह बताया गया कि 54% प्रजनन आयु की महिलाएं और 57% किशोर इस स्थिति से प्रभावित हैं।
राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अभियान में बच्चों, किशोरों, प्रजनन आयु की महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को लक्षित किया जाएगा। इसका मुख्य ध्यान एनीमिया की स्क्रीनिंग, उपचार, नियमित फॉलो-अप और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर होगा।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, कुछ जनजातीय और अन्य जिलों में एनीमिया की दर 67% तक पहुंच गई है। चिंताजनक बात यह है कि 17 जिलों में एनीमिया की प्रचलन दर राज्य के औसत से अधिक है, जिससे लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
सरकार ने एनीमिया के मामलों का लगभग आधा हिस्सा आयरन की कमी से होने की पहचान की है। अन्य कारणों में विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी, बार-बार होने वाले संक्रमण और थैलेसीमिया तथा सिकल सेल रोग जैसे आनुवंशिक रक्त विकार शामिल हैं। इन अंतर्निहित समस्याओं का समाधान अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
आगे देखते हुए, महाराष्ट्र सरकार इस अभियान के तहत विभिन्न रणनीतियों को लागू करने की योजना बना रही है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। यह पहल चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी, जिसमें 2030 के लक्ष्य की दिशा में प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। यह सक्रिय दृष्टिकोण न केवल महाराष्ट्र में महिलाओं और किशोरों के स्वास्थ्य में सुधार करने का लक्ष्य रखता है, बल्कि राज्य में समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को भी बेहतर बनाने का प्रयास करेगा।


