यूक्रेन ने भारत के संघर्ष विराम प्रस्ताव पर विचार करने की जताई इच्छा
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री स्यबिहा ने भारत के प्रस्ताव को चार में से सबसे व्यापक बताया।
यूक्रेन ने भारत के संघर्ष विराम प्रस्ताव पर विचार करने की इच्छा जताई है।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने हजारों नागरिकों की जान ली है और व्यापक तबाही मचाई है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी के शांति प्रयासों की सराहना की।
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री स्यबिहा ने घोषणा की है कि यूक्रेन भारत के संघर्ष विराम प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार है, जिसे उन्होंने चार में से सबसे व्यापक बताया। यह बयान 2 अक्टूबर 2026 को कीव में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दिया गया, जहां स्यबिहा ने ऊर्जा अवसंरचना और काला सागर की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
यह संघर्ष, जो फरवरी 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से पांच साल से अधिक समय से चल रहा है, हजारों नागरिकों की मौत और लाखों लोगों के विस्थापन का कारण बना है। युद्ध ने घरों और महत्वपूर्ण अवसंरचना को भी व्यापक नुकसान पहुंचाया है, जिससे समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आह्वान किया जा रहा है। स्यबिहा ने बताया कि संघर्ष विराम के लिए प्रस्ताव तुर्की, मिस्र और अमेरिका द्वारा भी प्रस्तुत किए गए हैं, जो इस संकट के वैश्विक महत्व को दर्शाता है।
स्यबिहा के बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की टिप्पणियों के बाद आए हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति समाधान के लिए सकारात्मक विचारों की सराहना की। हाल की बैठक में, पुतिन ने संकेत दिया कि मोदी हमेशा अपने चर्चाओं में शांति के मुद्दे को उठाते हैं, जो एक समाधान खोजने में आपसी रुचि को दर्शाता है। क्रेमलिन ने भारत के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन व्यक्त किया है, जो संवाद पर केंद्रित है।
जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती जा रही है, यूक्रेन ने फिर से संघर्ष विराम की आवश्यकता को दोहराया है, जिसमें न केवल सैन्य गतिविधियों को शामिल किया जाना चाहिए, बल्कि ऊर्जा और बंदरगाह अवसंरचना की सुरक्षा भी होनी चाहिए। काला सागर इस समय व्यावसायिक शिपिंग के लिए एक खतरनाक क्षेत्र बन गया है, जहां मिसाइल और ड्रोन हमलों में वृद्धि हुई है।
आगे देखते हुए, यूक्रेन अपनी सीमाओं पर बिना शर्त संघर्ष विराम की मांग पर अडिग है, जो मॉस्को द्वारा एक व्यापक शांति समझौते की आवश्यकता के साथ मिलती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है, और उम्मीद है कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए फिर से कूटनीतिक प्रयास किए जाएंगे।



