ट्रम्प का रूस से डीजल सौदा: अमेरिकी नीतियों में दोहरा मापदंड
ट्रम्प के रूस से डीजल आयात के फैसले ने अमेरिका की ऊर्जा नीति में दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं, खासकर भारत के संदर्भ में।
ट्रम्प ने अमेरिका के लिए 300,000 टन से अधिक रूसी डीजल के आयात की घोषणा की।
अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए शुल्क लगाया था।
आलोचकों का कहना है कि यह दोहरा मापदंड रूस के खिलाफ अमेरिका के दावों को कमजोर करता है।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ 300,000 टन से अधिक डीजल अमेरिका में आयात करने के लिए एक सौदा करने की घोषणा की है। यह घोषणा 9 अक्टूबर को की गई थी, जब अमेरिका ने भारत जैसे देशों की रूसी तेल खरीद पर आलोचना की थी।
इस सौदे का संदर्भ महत्वपूर्ण है। 2025 में, ट्रम्प ने भारतीय वस्तुओं पर 25% शुल्क लगाया था, जिसे उन्होंने भारत के रूसी तेल आयात से जोड़ा था, यह तर्क करते हुए कि ये खरीदें रूस की अर्थव्यवस्था और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियानों का समर्थन करती हैं। यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य उन देशों को दंडित करना था जो रूस के साथ व्यापार जारी रखते थे।
ट्रम्प के सौदे की विडंबना तब और बढ़ जाती है जब हाल की अमेरिकी कानूनों को देखा जाता है, जो प्रशासन को उन देशों पर 100% तक के शुल्क लगाने का अधिकार देते हैं जो रूसी ऊर्जा खरीदना जारी रखते हैं। यह कानूनी ढांचा देशों पर दबाव डालने के लिए है कि वे अपनी खरीदें रोकें, फिर भी ट्रम्प का रूसी डीजल आयात करने का समझौता इस रुख के विपरीत है। उन्होंने इस सौदे को सही ठहराते हुए कहा कि यह अमेरिकी उपभोक्ताओं, किसानों और ट्रक चालकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करने में मदद करेगा।
इस सौदे के प्रभाव केवल अमेरिका की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। भारत, जो लगभग 90% कच्चे तेल का आयात करता है और रूसी तेल का एक महत्वपूर्ण खरीदार है, अमेरिका से बढ़ते शुल्क का सामना कर सकता है। भारतीय सरकार ने अपनी ऊर्जा खरीद को राष्ट्रीय हित में बताते हुए उचित ठहराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस वर्ष पहले कहा था कि अमेरिका ने भारत से 2022 में वैश्विक बाजार को स्थिर करने के लिए रूसी तेल खरीदने का अनुरोध किया था, जिससे वर्तमान दंडात्मक उपायों की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
जैसे-जैसे स्थिति विकसित हो रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस सौदे के अमेरिका-भारत संबंधों और व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर प्रभाव को ध्यान से देखेगा। आलोचकों, जिनमें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर ज़ेलेंस्की भी शामिल हैं, ने ट्रम्प के कार्यों की निंदा की है, यह तर्क करते हुए कि रूसी ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंधों को आसान बनाना रूस की सैन्य आक्रामकता को रोकने के प्रयासों को कमजोर करता है। अमेरिका की ऊर्जा नीति का भविष्य और इसके वैश्विक बाजारों पर प्रभाव अनिश्चित बना हुआ है।



