ट्रंप ने 25 अक्टूबर को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया

हालिया बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जल्द ही हो सकती है, जबकि एक कूटनीतिक समझौते की संभावना भी जताई।

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Aapla Nagpur Desk
25 Oct 2026, 8:40 AM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Indiatoday
ट्रंप ने 25 अक्टूबर को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया
खास बातें
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ट्रंप ने कहा कि ईरान पर सैन्य हमले 25 अक्टूबर को हो सकते हैं।

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उन्होंने ईरान की शांति समझौते को मानने की इच्छा पर संदेह व्यक्त किया।

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अमेरिकी सेना ने ईरानी बलों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया।

शनिवार को फ्लोरिडा में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 25 अक्टूबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जबकि सैन्य कार्रवाई एक संभावना है, उन्होंने आगे के हमलों के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। ट्रंप के ये बयान अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आए हैं, विशेष रूप से हाल ही में तेहरान के खिलाफ की गई धमकी के बाद।

इस स्थिति का संदर्भ 28 फरवरी से शुरू होता है, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरानी सैन्य लक्ष्यों पर हमले शुरू किए, जिसके परिणामस्वरूप कई हताहत हुए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत भी शामिल है। इस सैन्य अभियान को ट्रंप ने 'एपिक फ्यूरी' कहा है, जिसने क्षेत्र में और अधिक संघर्ष की आशंकाएं बढ़ा दी हैं, खासकर जब ईरान को खाड़ी में समुद्री संचार केबलों को लक्षित करने की तैयारी का आरोप लगाया गया है।

अपने बयान में, ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता को उजागर किया, यह दावा करते हुए कि अमेरिकी बलों ने कई ईरानी सैन्य संपत्तियों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया है। उन्होंने कहा, "हमारी नौसेना और सेना ने अद्भुत काम किया है," जबकि उन्होंने ईरान की आर्थिक चुनौतियों, जैसे उच्च मुद्रास्फीति का भी उल्लेख किया। सैन्य ध्यान के बावजूद, ट्रंप ने ईरान के साथ एक 'बड़ा, सुंदर समझौता' होने की संभावना का भी उल्लेख किया, जो कूटनीति के साथ-साथ सैन्य तत्परता का द्वंद्व दर्शाता है।

ट्रंप के बयानों के प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण हैं। संभावित सैन्य कार्रवाई की संभावना मध्य पूर्व में बढ़ते हुए हिंसा की चिंताओं को बढ़ाती है, जो वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए व्यापक परिणाम हो सकती है। इसके अलावा, ट्रंप द्वारा ईरान की किसी भी शांति समझौते के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाना पहले से ही तनावपूर्ण कूटनीतिक परिदृश्य में एक और परत जोड़ता है।

आगे देखते हुए, स्थिति तरल बनी हुई है, जिसमें संभावित सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक वार्ता दोनों ही मेज पर हैं। जैसे-जैसे तनाव बढ़ता है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय विकास पर करीबी नजर रखेगा, विशेष रूप से अमेरिका सरकार द्वारा ईरान के साथ अपने अगले कदमों के बारे में किए गए किसी भी घोषणा पर।

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