ट्रंप ने यूक्रेन पर पुतिन और शी के साथ त्रिपक्षीय वार्ता का समर्थन किया
डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन और शी के साथ बातचीत के लिए सहमति जताई, सुझाव दिया कि यूक्रेन को नया वार्ताकार नियुक्त करना चाहिए।
ट्रंप ने यूक्रेन के लिए पुतिन और शी के साथ त्रिपक्षीय वार्ता का प्रस्ताव रखा।
ज़ेलेंस्की की वार्ता रणनीतियों की आलोचना की गई।
संभावित बैठक एपीईसी शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ यूक्रेन के संघर्ष पर त्रिपक्षीय वार्ता करने के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने सुझाव दिया कि यूक्रेन को अपनी ओर से वार्ता के लिए एक नया प्रतिनिधि नियुक्त करना चाहिए, यह कहते हुए कि वर्तमान दृष्टिकोण ने कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं की है।
ट्रंप की टिप्पणियाँ उस समय आईं जब क्रेमलिन ने त्रिपक्षीय बैठक की संभावना पर चर्चा की, जो 18-19 नवंबर को चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। हालांकि बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके आसपास की बातचीत यूक्रेन युद्ध से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिलताओं को दर्शाती है।
अपने बयान में, ट्रंप ने प्रस्तावित वार्ता का मुख्य ध्यान परमाणु हथियारों और निरस्त्रीकरण पर रखने पर जोर दिया, जबकि व्यापार और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा करने की गुंजाइश छोड़ी। उन्होंने कहा, "अगर राष्ट्रपति शी इसे चाहते हैं, तो मैं इसे करूंगा," यह दर्शाते हुए कि वे संघर्ष के समाधान की दिशा में संवाद करने के लिए तैयार हैं।
ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की भी आलोचना की, यह कहते हुए कि यूक्रेनी नेता को संघर्ष के दौरान रूस के साथ एक समझौता करने का प्रयास पहले करना चाहिए था। उन्होंने कहा, "ज़ेलेंस्की नहीं जानते कि वे क्या कह रहे हैं," और व्यक्त किया कि यूक्रेन के लिए एक नए वार्ताकार की आवश्यकता हो सकती है। यह आलोचना अमेरिका और यूक्रेन के बीच रूस के प्रति अमेरिकी नीतियों को लेकर बढ़ते तनाव के बीच आई है।
जैसे-जैसे संभावित शिखर सम्मेलन पर चर्चा जारी है, यूक्रेन की वार्ता में प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा है कि पुतिन के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक अमेरिका में दिसंबर में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। हालांकि, मॉस्को और वाशिंगटन से पुष्टि अभी भी लंबित है, जिससे इन कूटनीतिक प्रयासों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

