सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सीएम के ओएसडी के खिलाफ सीबीआई FIR को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री के विशेष कर्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित सीबीआई FIR को रोकने से इनकार किया है।

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Aapla Nagpur Desk
12 Oct 2026, 12:15 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Livelaw
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सीएम के ओएसडी के खिलाफ सीबीआई FIR को बरकरार रखा
खास बातें
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सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई FIR में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया।

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FIR में भ्रष्टाचार और प्रभाव डालने के आरोप शामिल हैं।

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पंजाब सरकार को सीबीआई जांच में सहयोग करना होगा।

12 अक्टूबर 2026 को, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कर्ता (OSD) राजबीर सिंह घुमान के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित सीबीआई FIR को रोकने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने स्पष्ट किया कि FIR सक्रिय रहेगी, लेकिन जांच के दौरान किसी भी दंडात्मक कार्रवाई को नहीं किया जाएगा।

यह निर्णय पंजाब सरकार द्वारा दायर की गई याचिका के बाद आया, जिसने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पिछले आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने सीबीआई को घुमान और अन्य पांच व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और प्रभाव डालने के आरोपों की जांच करने का आदेश दिया था।

कार्यवाही के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पंजाब सरकार का प्रतिनिधित्व किया, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता दामा सेशाद्री नायडू ने याचिकाकर्ता का बचाव किया, जिसने राज्य के उत्पीड़न के बारे में चिंता व्यक्त की। नायडू ने तर्क किया कि याचिकाकर्ता को पंजाब सरकार से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जिसमें संपत्ति का ध्वंस शामिल था, और आगे के राज्य उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की।

यह FIR 5 अक्टूबर 2026 को उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद दर्ज की गई थी, जिसमें पंजाब पुलिस को सीबीआई को एक उचित जांच सुनिश्चित करने के लिए सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। इस मामले के विकास से पंजाब में शासन और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

आगे देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय पंजाब सरकार के लिए सीबीआई की जांच में पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे मामला विकसित होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और सीबीआई दोनों की ओर से सबूतों के प्रबंधन और शामिल व्यक्तियों की सुरक्षा के संबंध में क्या प्रतिक्रियाएँ आती हैं।

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