सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं के विपणन पर समिति बनाने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों द्वारा अनैतिक विपणन प्रथाओं को रोकने के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया है।

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Aapla Nagpur Desk
8 Oct 2026, 10:45 AM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Livelaw
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं के विपणन पर समिति बनाने का आदेश दिया
खास बातें
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दवा कंपनियों के अनैतिक विपणन को नियंत्रित करने के लिए समिति बनाने का आदेश दिया।

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समिति की सिफारिशों पर 29 जनवरी को सुनवाई की जाएगी।

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यह कदम मौजूदा विपणन कोड के प्रवर्तन पर उठाए गए सवालों के बाद आया है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए केंद्र सरकार को दवा कंपनियों द्वारा अनैतिक विपणन प्रथाओं को रोकने के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्वास्थ्य पेशेवरों और दवा कंपनियों के बीच के संबंधों को संबोधित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो नैतिक मानकों को प्रभावित कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने समिति के कार्य की महत्ता को रेखांकित किया, जो दवा विपणन के संबंध में विभिन्न सुझावों और प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करेगी। कोर्ट ने 29 जनवरी 2027 को एक सुनवाई निर्धारित की है, जिसमें केंद्र सरकार से अनुपालन शपथ पत्र की समीक्षा की जाएगी, ताकि सिफारिशों को गंभीरता से लिया जा सके।

यह आदेश एक याचिका के संदर्भ में आया है, जो दवा विपणन प्रथाओं के लिए वैधानिक नियमों की मांग कर रही थी। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संकेत दिया कि केंद्र सरकार अनैतिक प्रथाओं को नियंत्रित करने के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाने के लिए तैयार है। यह प्रतिबद्धता दवा विपणन में निगरानी की आवश्यकता को दर्शाती है।

ऐतिहासिक रूप से, कोर्ट ने 2024 में स्थापित यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP) की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या सरकार कोड को वैधानिक समर्थन देने का इरादा रखती है। बिना सरकारी निगरानी के, कोड की अनिवार्यता प्रभावहीन हो सकती है, जिससे अनुपालन स्वैच्छिक हो सकता है।

इस आदेश के प्रभाव स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि समिति सख्त नियमों की स्थापना करती है, तो यह डॉक्टर-रोगी संबंध में विश्वास को बहाल कर सकती है और यह सुनिश्चित कर सकती है कि चिकित्सा निर्णय रोगी की भलाई के आधार पर लिए जाएं, न कि दवा कंपनियों के प्रोत्साहनों पर। जैसे-जैसे स्थिति विकसित होती है, स्वास्थ्य और दवा उद्योग के हितधारक समिति की सिफारिशों और सरकार की प्रतिक्रिया पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

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