21 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक सेवकों के लिए BNSS सुरक्षा को स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केरल सीएम पिनराई विजयन के मामले में BNSS के तहत सार्वजनिक सेवकों के लिए नए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डाला।

A
Aapla Nagpur Desk
21 Oct 2026, 5:11 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Livelaw
21 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक सेवकों के लिए BNSS सुरक्षा को स्पष्ट किया
खास बातें
1

सुप्रीम कोर्ट ने BNSS के तहत सार्वजनिक सेवकों के लिए धारा 175(4) के तहत विस्तारित सुरक्षा उपायों पर जोर दिया।

2

यह निर्णय पूर्व धारा 156(3) के साथ नए प्रावधानों की तुलना करता है, जिसमें सार्वजनिक सेवक की भागीदारी की आवश्यकता है।

3

कोर्ट ने विजयन के खिलाफ जांच को अस्थायी रूप से रोक दिया, जिससे उन्हें उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मिली।

21 अक्टूबर 2026 को, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के मामले में सार्वजनिक सेवकों के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। कोर्ट के इस निर्णय ने एक महत्वपूर्ण बदलाव को उजागर किया, जिसमें एक मजिस्ट्रेट द्वारा सार्वजनिक सेवकों के खिलाफ जांच के आदेश देने से पहले उपलब्ध सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया है।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने बताया कि BNSS की धारा 175(4) में FIR के पंजीकरण से पहले सार्वजनिक सेवक और उनके वरिष्ठ अधिकारी की भागीदारी की आवश्यकता है। यह पूर्व धारा 156(3) के विपरीत है, जिसमें ऐसी भागीदारी की आवश्यकता नहीं थी, जिससे जांच बिना सार्वजनिक सेवक की भागीदारी के आगे बढ़ सकती थी।

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि नए प्रावधान से सार्वजनिक सेवकों को किसी भी न्यायिक निर्देश के जारी होने से पहले अपनी दलीलें प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है, क्योंकि यह सार्वजनिक सेवकों को मनमाने ढंग से जांचों से बचाने का प्रयास करता है, जबकि उन्हें अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार भी ठहराता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 175(4) का संदर्भ विजयन के खिलाफ आरोपों की वैधता पर टिप्पणी करने के लिए नहीं था, बल्कि मौजूदा प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को उजागर करने के लिए था।

इस निर्णय के प्रभाव तत्काल मामले से परे हैं, क्योंकि यह भविष्य में सार्वजनिक सेवकों के खिलाफ शिकायतों के निपटारे के तरीके के लिए एक मिसाल स्थापित करता है। कोर्ट द्वारा जांच को सात दिनों के लिए स्थगित करने का निर्णय विजयन और अन्य याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत प्राप्त करने का समय देता है, जो समान आरोपों का सामना कर रहे सार्वजनिक अधिकारियों के लिए व्यापक परिणाम हो सकता है।

आगे देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय सार्वजनिक सेवकों के लिए जिम्मेदारी और सुरक्षा के बीच संतुलन पर आगे चर्चा को जन्म दे सकता है। कानूनी समुदाय इस मामले के परिणामों और BNSS या संबंधित कानूनी ढांचे में संभावित परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित करेगा।

💬इस खबर पर आपकी क्या राय है?आपकी राय क्या है?

आगे पढ़ें