स्रीधर वेंबू ने अमेरिका के वीजा प्रतिबंधों के बीच भारतीयों से लौटने की अपील की
जोहो के संस्थापक ने अमेरिकी सरकार द्वारा आईटी कंपनियों पर कार्रवाई के बाद भारतीय पेशेवरों से भारत लौटने का आग्रह किया।
अमेरिका ने आठ प्रमुख आईटी कंपनियों के लिए PERM आवेदन निलंबित कर दिए हैं, जिसका प्रभाव भारतीय श्रमिकों पर पड़ेगा।
स्रीधर वेंबू ने अमेरिका में भारतीयों के योगदान को उजागर करते हुए भारत लौटने की अपील की।
यह निर्णय आईटी क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, जिससे भारतीयों की संभावित वापसी हो सकती है।
8 अक्टूबर 2026 को, अमेरिका सरकार ने आठ प्रमुख आईटी कंपनियों, जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट, टाटा, विप्रो और इन्फोसिस के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) आवेदन निलंबित करने की घोषणा की। इस कदम का आईटी क्षेत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है, विशेष रूप से अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए। इसके जवाब में, जोहो के संस्थापक स्रीधर वेंबू ने भारतीयों से घर लौटने और देश के विकास में योगदान देने की भावुक अपील की।
वेंबू का यह बयान अमेरिका सरकार के निर्णय के बाद आया है, जिसे वह भारतीय पेशेवरों के प्रति बढ़ती नकारात्मकता के रूप में देखते हैं, जबकि उन्होंने देश में तकनीकी प्रगति में भारतीयों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, "भारतीयों ने अमेरिका की तकनीकी क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फिर भी, अमेरिका का एक बड़ा हिस्सा अब हमें नहीं चाहता।"
यह घोषणा अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सॉंडरलिंग द्वारा की गई, जिन्होंने पुष्टि की कि सरकार प्रभावित कंपनियों से नए या लंबित PERM आवेदनों को संसाधित नहीं करेगी। यह निर्णय अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी को भी प्रभावित करता है, और इससे अमेरिका में वीजा पर काम कर रहे भारतीय श्रमिकों के लिए जीवन और करियर में संभावित upheaval का डर बढ़ गया है। वेंबू ने इस स्थिति को एक नए प्रारंभ के अवसर के रूप में देखने का आग्रह किया।
इस कार्रवाई के प्रभाव केवल व्यक्तिगत श्रमिकों तक सीमित नहीं हैं; यह भारत में आईटी परिदृश्य को भी पुनः आकार दे सकता है क्योंकि पेशेवर घर लौटने पर विचार कर सकते हैं। वेंबू का यह आह्वान उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जिन्होंने अमेरिका में अपनी ज़िंदगी बनाई है, लेकिन अब वे भारत की बढ़ती तकनीकी उद्योग में योगदान देने के लिए मजबूर हो सकते हैं। यह स्थिति वैश्विक प्रतिभा गतिशीलता और अमेरिका में विदेशी श्रमिकों के प्रति बदलते दृष्टिकोण को उजागर करती है।
आगे देखते हुए, अमेरिका में भारतीय आईटी पेशेवरों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। जैसे-जैसे स्थिति विकसित होती है, कई लोग यह देखने के लिए बेताब होंगे कि यह कार्यबल को कैसे प्रभावित करता है और क्या यह भारत में महत्वपूर्ण प्रवास को प्रेरित करता है। वेंबू का संदेश इन परिवर्तनों के बीच अपने अगले कदम पर विचार करने वालों के लिए एक प्रेरणादायक आह्वान है।



