सेंसेक्स 2,000 अंक से अधिक बढ़ा, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का प्रभाव
सेंसेक्स ने 2,000 अंक से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जबकि तेल की कीमतों में गिरावट आई, जो अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणामों से प्रेरित है।
सेंसेक्स ने गुरुवार को 79,369.26 पर बंद होकर 2.68% की वृद्धि की।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें दो महीने के निचले स्तर पर $93.5 प्रति बैरल पर पहुंच गईं।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयरों में ₹72,840 करोड़ का निवेश किया।
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स में जबरदस्त वृद्धि हुई, जो 79,369.26 पर बंद हुआ, जो 2,000 अंकों से अधिक, या 2.68% की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि एक मजबूत शुरुआत के बाद हुई, जब सूचकांक लगभग 1,300 अंकों की बढ़त के साथ खुला। इस रैली का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट थी, जो दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणामों के प्रति आशा थी।
हालिया अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों चैंबरों पर नियंत्रण हासिल किया, जिसे निवेशकों द्वारा ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के संबंध में भू-राजनीतिक तनावों में कमी के संभावित संकेत के रूप में देखा गया। यह राजनीतिक बदलाव वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से भारतीय शेयरों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की उम्मीद है।
बाजार के प्रदर्शन के संदर्भ में, सेंसेक्स पहले ही सुधार के संकेत दिखा रहा था, जिसने पिछले पांच सत्रों में 4,000 अंकों या 5% की वृद्धि की। बुधवार को, सूचकांक 77,301.40 पर बंद हुआ, जो दो महीने में इसका उच्चतम स्तर था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को भारतीय शेयरों में ₹72,840 करोड़ ($769.65 मिलियन) का निवेश किया, जो इस वर्ष की शुरुआत में भारी बिकवाली के बाद भारतीय बाजार में फिर से रुचि का संकेत है।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, जो $93.5 प्रति बैरल पर आ गई है, भी अनुकूल बाजार स्थितियों में योगदान कर रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह गिरावट जारी रहती है, तो यह भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक दृष्टिकोण को बेहतर बना सकती है। एचएसटी वेल्थ के सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि तेल की कीमतों में गिरावट की मात्रा भारत के निकट-अवधि आर्थिक प्रदर्शन और कॉर्पोरेट कमाई को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती है।
आगे देखते हुए, बाजार के प्रतिभागी अमेरिकी राजनीति और वैश्विक तेल कीमतों में आगे के विकास पर करीबी नजर रखेंगे। विदेशी निवेशकों की निरंतर खरीदारी और शेयर बाजार में संभावित और वृद्धि महत्वपूर्ण कारक होंगे, जिन्हें आने वाले हफ्तों में मध्यावधि चुनावों के प्रभावों के साथ देखा जाएगा।




