मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर में विरोध प्रदर्शन
7 अक्टूबर 2026 को, प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर का जश्न विरोध प्रदर्शनों से ढक गया।
मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे किए, जबकि विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
राहुल गांधी सहित विपक्षी नेता चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो दर बढ़ाई।
7 अक्टूबर 2026 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया, जबकि भारत भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मोदी के कार्यकाल को सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए, लेकिन विपक्षी दलों ने दिल्ली के केंद्रीय क्षेत्र में धरना प्रदर्शन किया, जिसमें चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की गई।
ये विरोध प्रदर्शन उस समय हो रहे हैं जब मोदी की नेतृत्व शैली पर बढ़ती आलोचना हो रही है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से, मोदी भारतीय राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। उनके समर्थक उनके योगदान की सराहना करते हैं, जबकि आलोचक यह तर्क करते हैं कि उनकी नीतियों ने सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को बढ़ाया है। विपक्ष के ये कदम विभिन्न वर्गों के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाते हैं, विशेष रूप से चुनावी पारदर्शिता और शासन के मुद्दों पर।
एक रैली में, मोदी ने अपने समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि भारतीय जनता के सामूहिक प्रयासों ने देश को विकास की ओर अग्रसर किया है। उन्होंने एकता के महत्व पर जोर दिया और कहा, "2026 में विकसित भारत का सपना जरूर पूरा होगा।" इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की, जो तीन साल में पहली बार है।
इन विरोध प्रदर्शनों और आरबीआई के निर्णय के प्रभाव भारत के राजनीतिक परिदृश्य और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। विपक्ष की सक्रियता आगामी चुनावों में जन भावना में संभावित बदलाव का संकेत देती है। इसके अलावा, आरबीआई की दर वृद्धि उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए उधारी की लागत को प्रभावित करेगी, जो पहले से ही एक दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालेगी।
आगे देखते हुए, भारत में राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि विपक्षी दल 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं। इन प्रदर्शनों का परिणाम और सरकार की प्रतिक्रिया मोदी के प्रशासन और देश के व्यापक सामाजिक-राजनीतिक वातावरण को आकार देने में महत्वपूर्ण होगी।




