जयशंकर का सनक के 'मध्य शक्ति' टिप्पणी पर चतुर जवाब

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रिषी सनक की 'मध्य शक्ति' की पहचान पर मजेदार प्रतिक्रिया दी।

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Aapla Nagpur Desk
14 Oct 2026, 12:26 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Moneycontrol
जयशंकर का सनक के 'मध्य शक्ति' टिप्पणी पर चतुर जवाब
खास बातें
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जयशंकर ने भारत के वैश्विक प्रभाव पर जोर दिया, 'मध्य शक्ति' लेबल को अस्वीकार किया।

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उन्होंने आधुनिक भू-राजनीति में आर्थिक निर्भरताओं और चोक पॉइंट्स के महत्व को उजागर किया।

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इस चर्चा में अन्य वैश्विक नेताओं के विचार भी शामिल थे।

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री रिषी सनक की 'मध्य शक्ति' की पहचान पर मजेदार प्रतिक्रिया देकर सुर्खियाँ बटोरीं। सनक ने पैनल का परिचय देते हुए कहा, 'यह मध्य शक्तियों का पैनल है,' जिस पर जयशंकर ने हंसते हुए कहा, 'मैं यहाँ एक शिष्टाचार के रूप में हूँ।' यह हल्का-फुल्का आदान-प्रदान एक गहन चर्चा के लिए मंच तैयार करता है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में 'मध्य शक्ति' का अर्थ उन देशों से है जो सुपरपावर नहीं हैं, लेकिन फिर भी महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह लेबल भारत की स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता, क्योंकि इसकी विशाल जनसंख्या और बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा, 'मध्य शक्ति से अधिक, हम एक तरह से मध्य में शक्तियाँ हैं,' यह सुझाव देते हुए कि भारत की संभावनाएँ और योगदान इस वर्गीकरण की सीमाओं से परे हैं।

जयशंकर ने वैश्विक शक्ति के बदलते समीकरण पर भी बात की, यह कहते हुए कि प्रमुख शक्तियों के बीच स्थित देशों को अपनी राह खुद तय करनी होगी। उन्होंने आर्थिक निर्भरताओं के बढ़ते उपयोग को भू-राजनीतिक दबाव के उपकरण के रूप में बताया, जैसे कि रणनीतिक संसाधन और वित्तीय प्रतिबंध। 'आज यह चोक पॉइंट्स की दुनिया है,' उन्होंने कहा, यह बताते हुए कि देशों को इन बदलते चुनौतियों को पहचानने और अनुकूलित करने की आवश्यकता है।

इन चर्चाओं के निहितार्थ भारत की विदेश नीति और अन्य देशों के साथ उसके संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हैं। जयशंकर के विचार एक अधिक सहयोगात्मक दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हैं, जहाँ देश आपसी हितों और योगदान के आधार पर बातचीत करते हैं। उन्होंने कहा, 'हम एक ऐसी दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ प्रतिस्पर्धा इस बात पर होगी कि किसके पास क्या है।' यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय संबंधों के पुनर्गठन का संकेत देता है, जो पारंपरिक शक्ति संरचनाओं के बजाय साझेदारी पर केंद्रित है।

आगे देखते हुए, जयशंकर की टिप्पणियाँ वैश्विक परिवर्तनों के संदर्भ में भारत के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण का संकेत देती हैं। जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य विकसित होता है, सहयोग और आपसी लाभ पर जोर भारत की कूटनीतिक रणनीतियों को आकार देगा। इस फोरम में कनाडाई विदेश मंत्री अनिता आनंद और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रड के विचार भी शामिल थे, जो वैश्विक शासन और सहयोग के भविष्य पर व्यापक संवाद को दर्शाते हैं।

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