कांग्रेस को चार राज्यों में MLC चुनावों में बड़ा नुकसान
23 अक्टूबर 2026 को हुए विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस को कर्नाटका, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण हार का सामना करना पड़ा।
कर्नाटका में कांग्रेस ने राज्य में बहुमत होने के बावजूद कोई सीट नहीं जीती।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी और एसपी ने जीत दर्ज की, जबकि बिहार में जन सुराज पार्टी ने अपनी पहचान बनाई।
महाराष्ट्र में मतगणना जारी है, बीजेपी के सुधाकर कोहले नागपुर में आगे हैं।
23 अक्टूबर 2026 को हुए विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस पार्टी को चार राज्यों में, कर्नाटका, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में, महत्वपूर्ण हार का सामना करना पड़ा है। मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई, और अब तक घोषित परिणामों में कांग्रेस ने कोई सीट नहीं जीती, जो पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है।
कर्नाटका में बीजेपी-जेडी(S) गठबंधन ने सभी चार विधान परिषद सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को कोई सफलता नहीं मिली। जेडी(S) के उम्मीदवार ए पी रंगनाथ ने बेंगलुरु शिक्षकों की सीट पर कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुत्तन्ना को हराया, जो गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। बीजेपी ने तीन अन्य सीटें भी बरकरार रखी हैं, जिससे उसकी स्थिति मजबूत हुई है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने 11 विधान परिषद सीटों में से चार पर जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी (एसपी) ने दो सीटें जीतीं। बीजेपी की जीत में बरेली-मुरादाबाद शिक्षकों की सीट और लखनऊ शिक्षकों की सीट शामिल हैं, जबकि एसपी ने वाराणसी और आगरा-अलीगढ़ में सफलता पाई। मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों ने विवाद पैदा कर दिया, जिसके चलते एसपी ने मतगणना का बहिष्कार किया।
बिहार में चुनावों ने कई अप्रत्याशित परिणाम दिए, जहां जन सुराज पार्टी ने कांग्रेस को हराकर अपनी पहली सीट जीती। आरजेडी ने भी महत्वपूर्ण जीत हासिल की, बीजेपी से पटना शिक्षकों की सीट छीन ली। यह चुनाव चक्र एक बदलते राजनीतिक परिदृश्य को उजागर करता है, जिसमें नए दल स्थापित दलों को चुनौती दे रहे हैं।
महाराष्ट्र में मतगणना जारी है, जहां बीजेपी के सुधाकर कोहले नागपुर डिवीजन के ग्रेजुएट्स की सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के खिलाफ आगे चल रहे हैं। ये चुनाव परिणाम विधान परिषद की संरचना को निर्धारित करेंगे, क्योंकि वर्तमान सदस्यों की अवधि जल्द समाप्त होने वाली है। अंतिम परिणाम 31 अक्टूबर 2026 तक आने की उम्मीद है, जो आगे के राजनीतिक गतिशीलता को स्पष्ट करेगा।


