CJP नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका वापस ली

सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के विस्तार के खिलाफ अपनी याचिका वापस ली।

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Aapla Nagpur Desk
21 Oct 2026, 1:45 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Livelaw
CJP नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका वापस ली
खास बातें
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CJP नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी याचिका वापस ली।

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न्यायालय ने वैकल्पिक उपायों की उपलब्धता की ओर इशारा किया।

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यह मामला विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांति बंधनों के उल्लंघन से संबंधित है।

सौरव दास और आशुतोष रांका, जो कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता हैं, ने दिल्ली उच्च न्यायालय से अपनी कानूनी याचिका वापस ले ली है, जिसमें न्यायिक हिरासत के विस्तार को चुनौती दी गई थी। यह वापसी 21 अक्टूबर 2026 को हुई, जब न्यायमूर्ति सुभ्रमण्यम प्रसाद ने याचिका को सुनने में अनिच्छा व्यक्त की और सुझाव दिया कि याचिकाकर्ताओं के लिए वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

दास और रांका की कानूनी समस्याएं मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ उनके विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण उन्हें प्रारंभिक रूप से हिरासत में लिया गया था। उन्हें 14 अक्टूबर 2026 को कार्यकारी मजिस्ट्रेट महेश कुमार मीना द्वारा पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, और 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ा दी गई। न्यायालय ने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं ने जंतर मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का प्रयास कर शांति बंधनों का उल्लंघन किया।

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति प्रसाद ने स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया लेकिन यह भी कहा कि जब कानूनी प्रावधान मौजूद हों, तो कानून उपाय प्रदान करता है। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे उस दिन बाद में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) न्यायालय में अपनी उपस्थिति के परिणाम की प्रतीक्षा करें। न्यायालय ने याचिका को बिना किसी मूल्यांकन के वापस लेने की अनुमति दी।

इस मामले के प्रभाव केवल याचिकाकर्ताओं की कानूनी स्थिति तक सीमित नहीं हैं। न्यायालय की टिप्पणियों ने CJP के प्रदर्शनों की बदलती प्रकृति के बारे में सवाल उठाए हैं, जो संगठन के उद्देश्यों और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए संभावित खतरों को उजागर करते हैं। न्यायालय ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं के पिछले प्रदर्शनों में छात्र शामिल थे, जबकि वर्तमान गतिविधियों में अधिक प्रतिभागियों को आकर्षित करने की संभावना है।

आगे देखते हुए, दास और रांका का भविष्य मुख्य रूप से SEM न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा। यदि SEM उनके पक्ष में निर्णय देता है, तो मामला समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि नहीं, तो नेताओं को आगे की कानूनी विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है। इस मामले में चल रही घटनाएं दिल्ली में विरोध के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं।

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