CJP नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायिक हिरासत के खिलाफ याचिका दायर की

सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत के विस्तार को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

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Aapla Nagpur Desk
20 Oct 2026, 5:20 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Livelaw
CJP नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायिक हिरासत के खिलाफ याचिका दायर की
खास बातें
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CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के विस्तार के खिलाफ याचिका दायर की।

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इन नेताओं को 14 अक्टूबर को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के प्रयास के लिए पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

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याचिका में कहा गया है कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने मनमाने तरीके से हिरासत का विस्तार किया।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने अपनी न्यायिक हिरासत के दो दिन के विस्तार को चुनौती दी है। यह कानूनी कदम 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा हिरासत बढ़ाने के आदेश के बाद उठाया गया है, जो कि 14 अक्टूबर से शुरू होकर पांच दिन के लिए निर्धारित थी।

इस मामले में आरोप है कि दास और रांका ने जन्तर मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का प्रयास करके शांति बंधनों का उल्लंघन किया। उनके वकील ने इस मामले में तात्कालिक सुनवाई की मांग की है, जिसमें उन्होंने हिरासत के अन्यायपूर्ण विस्तार के खिलाफ त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया है।

याचिका के अनुसार, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) पर आरोप है कि उन्होंने बिना उचित कारण के नेताओं की हिरासत का विस्तार किया। याचिका में कहा गया है कि हिरासत का आधार, जो बंधन के निष्पादन में विफलता का हवाला देता है, गलत है। इसमें यह भी कहा गया है कि 19 अक्टूबर को प्रस्तुत किए गए जमानतदार वैध थे और SEM का यह कहना कि कोई अन्य जमानतदार उपस्थित नहीं था, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

इस मामले के प्रभाव केवल कानूनी संदर्भ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भारत में व्यक्तियों के प्रदर्शन के अधिकारों और ऐसे कार्यों के लिए नियामक ढांचे पर सवाल उठाता है। अदालत के हिरासत बढ़ाने के निर्णय में नेताओं के पिछले आचरण के बारे में चिंताओं का प्रभाव पड़ा, विशेष रूप से उनके द्वारा उन क्षेत्रों में प्रदर्शन आयोजित करने के आरोपों के कारण जहां ऐसा करना प्रतिबंधित है।

आगे देखते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय की इस याचिका पर प्रतिक्रिया यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि दास और रांका की कानूनी लड़ाई का भविष्य क्या होगा। अदालत का निर्णय प्रदर्शन से संबंधित मामलों के उपचार और राजनीतिक असहमति के संदर्भ में सार्वजनिक व्यवस्था और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में एक मिसाल कायम कर सकता है।

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