सांगली में किसानों ने गन्ना परिवहन रोका, उचित मूल्य की मांग

सांगली जिले में किसान गन्ना मूल्य की घोषणा न होने पर चीनी मिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे परिवहन बाधित हुआ है।

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Aapla Nagpur Desk
12 Oct 2026, 2:43 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Chinimandi
सांगली में किसानों ने गन्ना परिवहन रोका, उचित मूल्य की मांग
खास बातें
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स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने गन्ने के लिए 4,500 रुपये प्रति टन की मांग की है।

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कृष्णा और हुतात्मा चीनी मिलों के लिए गन्ने का परिवहन रोका गया है।

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किसान उचित मूल्य की मांग को लेकर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं।

सांगली जिले में किसान गन्ने की उचित कीमत की मांग को लेकर चीनी मिलों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज कर रहे हैं। स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने गन्ना परिवहन को रोकते हुए कहा है कि गन्ने का मूल्य निर्धारित किए बिना मिलों को संचालन नहीं करने दिया जाएगा। यह प्रदर्शन राज्य सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से गन्ना पेराई सत्र शुरू करने की घोषणा के बाद हो रहा है, जबकि कुछ मिलों ने पहले ही काम शुरू कर दिया था।

किसानों की नाराजगी का कारण कृष्णा सहकारी चीनी मिल का गन्ना मूल्य तय किए बिना पेराई शुरू करना है। संगठन का कहना है कि यह किसानों के जीवनयापन के लिए आवश्यक है। कार्यकर्ताओं ने बहे पुल के पास 40 से 50 ट्रैक्टरों को रोक दिया और कई बैल गाड़ियों के पहियों की हवा निकाल दी। संगठन ने गन्ने की खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए 4,500 रुपये प्रति टन की कीमत की मांग की है।

कृष्णा मिल के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने हुतात्मा चीनी मिल के लिए भी गन्ना परिवहन रोका। वालवा तालुका के बावची फाटा क्षेत्र में, कार्यकर्ताओं ने गन्ना वाहनों को रोका और 4,500 रुपये प्रति टन की पहली किस्त की मांग की। संगठन का कहना है कि महंगाई और उर्वरक, कीटनाशक, श्रम और परिवहन की बढ़ती लागत ने गन्ना खेती की लागत को काफी बढ़ा दिया है।

यह आंदोलन महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव डाल रहा है, जहां किसान अपनी आर्थिक समस्याओं को लेकर increasingly vocal हो रहे हैं। स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जो किसानों के लिए उचित मुआवजे की आवश्यकता को दर्शाता है।

आगे देखते हुए, किसान संगठन चीनी मिलों पर दबाव बनाए रखने की योजना बना रहा है। गन्ना पेराई सत्र के शुरू होते ही स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और यदि वार्ताओं का परिणाम नहीं निकलता है, तो परिवहन और संचालन में और बाधाएं आ सकती हैं। किसान अपने श्रम के लिए उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

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