रायगढ़ जलविद्युत परियोजना को 32,000 पेड़ों की कटाई पर विरोध का सामना

रायगढ़ जलविद्युत परियोजना के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच, राज्य मंत्री ने पेड़ संरक्षण पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है।

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Aapla Nagpur Desk
2 Nov 2026, 8:41 AM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Mid-day
रायगढ़ जलविद्युत परियोजना को 32,000 पेड़ों की कटाई पर विरोध का सामना
खास बातें
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महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक परियोजना की समीक्षा कर रहे हैं ताकि पेड़ संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।

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टॉरेंट पावर का कहना है कि परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के संवेदनशील क्षेत्र के बाहर स्थित है।

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स्थानीय विरोध बढ़ रहा है, जिसमें 32,000 पेड़ों की कटाई के पर्यावरणीय प्रभाव पर चिंता जताई जा रही है।

रायगढ़, महाराष्ट्र में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को 32,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के कारण महत्वपूर्ण विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस विरोध के चलते महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने परियोजना की समीक्षा करने की घोषणा की है, जिसमें पेड़ संरक्षण और प्रतिस्थापन वृक्षारोपण को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इस परियोजना के खिलाफ विवाद तब बढ़ा जब पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने संभावित पारिस्थितिकीय नुकसान के बारे में अपनी चिंताएँ व्यक्त कीं। टॉरेंट पावर द्वारा समर्थित इस परियोजना का बचाव करते हुए, कंपनी का कहना है कि यह भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य और इसके संवेदनशील क्षेत्र की सीमाओं के बाहर स्थित है।

मंत्री नाइक ने पेड़ संरक्षण के वैकल्पिक तरीकों की खोज करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार विकासात्मक आवश्यकताओं और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। इसमें कटाई के लिए निर्धारित पेड़ों की संख्या को कम करने और प्रतिस्थापन वृक्षारोपण पहलों को बढ़ाने की संभावनाओं का आकलन करना शामिल है।

इस परियोजना के प्रभाव स्थानीय पर्यावरणीय चिंताओं से परे हैं, क्योंकि यह महाराष्ट्र में विकास बनाम संरक्षण के व्यापक मुद्दों को दर्शाता है। इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जैव विविधता और स्थानीय जलवायु स्थितियों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है, जिससे पर्यावरण समूहों और आम जनता के बीच चिंता बढ़ रही है।

आगे देखते हुए, राज्य सरकार हितधारकों के साथ चर्चा करने की योजना बना रही है, जिसमें टॉरेंट पावर और पर्यावरण कार्यकर्ता शामिल हैं, ताकि बढ़ती चिंताओं का समाधान किया जा सके। इन चर्चाओं का परिणाम रायगढ़ जलविद्युत परियोजना और इसके पर्यावरणीय प्रभाव के भविष्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगा।

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