जुन्नर वन विभाग ने दो मादा तेंदुओं को दिया गर्भनिरोधक टीका

जुन्नर में एक पायलट अध्ययन के तहत दो मादा तेंदुओं को गर्भनिरोधक टीके दिए गए हैं, जिससे उनकी जनसंख्या प्रबंधन में मदद मिलेगी।

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Aapla Nagpur Desk
18 Oct 2026, 7:37 AM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Mid-day
जुन्नर वन विभाग ने दो मादा तेंदुओं को दिया गर्भनिरोधक टीका
खास बातें
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यह परियोजना केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अनुमोदित है।

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इस अध्ययन में ICMR-NIRRCH और टीम RESQ शामिल हैं।

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यह पहल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने का लक्ष्य रखती है।

महाराष्ट्र के जुन्नर वन विभाग ने वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दो मादा तेंदुओं को गर्भनिरोधक टीका सफलतापूर्वक दिया है। यह पहल केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अनुमोदित एक पायलट अध्ययन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले क्षेत्रों में तेंदुओं की जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए गर्भनिरोधक विधियों की व्यवहार्यता का पता लगाना है।

टीका प्राप्त करने के बाद, दोनों तेंदुओं को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया। वन संरक्षक आशीष ठाकरे ने पुष्टि की कि यह परियोजना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संचालित होती है, जो इसके कानूनी और पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करती है। यह अध्ययन यह मूल्यांकन करने का प्रयास करता है कि क्या गर्भनिरोधक उपाय मानव-वन्यजीव संपर्क वाले क्षेत्रों में तेंदुओं की संख्या को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।

यह परियोजना जुन्नर वन विभाग, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय प्रजनन और बाल स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIRRCH) और टीम RESQ के पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है। अनुसंधान के हिस्से के रूप में, ICMR वैज्ञानिक तेंदुओं के रक्त के नमूनों का विश्लेषण करेंगे ताकि हार्मोनल परिवर्तनों की निगरानी की जा सके और टीके के दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन किया जा सके।

इस पहल के प्रभाव केवल जनसंख्या नियंत्रण तक सीमित नहीं हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले क्षेत्रों में तेंदुओं की संख्या को कम करके, यह परियोजना स्थानीय समुदायों की सुरक्षा को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, जबकि वन्यजीवों के संरक्षण को भी सुनिश्चित करती है। यह दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि वन्यजीवों से भरे क्षेत्रों में पारिस्थितिक स्वास्थ्य और मानव हितों के बीच संतुलन बनाने के लिए नवोन्मेषी समाधानों की आवश्यकता है।

आगे देखते हुए, अध्ययन टीका लगाए गए तेंदुओं की निगरानी जारी रखेगा और गर्भनिरोधक टीके की प्रभावशीलता पर डेटा एकत्र करेगा। भविष्य के आकलन यह निर्धारित करेंगे कि क्या इस विधि को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है, जहाँ तेंदुओं की जनसंख्या और मानव संपर्क के समान चुनौतियाँ हैं।

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