महाराष्ट्र पुलिस ने न्याय सेतु 2026 में साइबर फॉरेंसिक्स प्रशिक्षण बढ़ाया

महाराष्ट्र पुलिस ने मानव तस्करी से निपटने के लिए हाल ही में एक सम्मेलन में साइबर फॉरेंसिक्स और वित्तीय ट्रैकिंग पर ध्यान केंद्रित किया।

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Aapla Nagpur Desk
16 Oct 2026, 8:25 AM IST · 2 मिनट वाचन
Source: Mid-day
महाराष्ट्र पुलिस ने न्याय सेतु 2026 में साइबर फॉरेंसिक्स प्रशिक्षण बढ़ाया
खास बातें
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महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई में मानव तस्करी पर एक सम्मेलन आयोजित किया।

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मुख्य तकनीकों में साइबर फॉरेंसिक्स और वित्तीय लेनदेन का पता लगाना शामिल था।

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इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य भर में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स की क्षमताओं को मजबूत करना था।

16 अक्टूबर 2026 को, महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई में मानव तस्करी से निपटने के लिए साइबर फॉरेंसिक्स को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया। इस कार्यक्रम का नाम न्याय सेतु 2026 था, जिसमें वित्तीय लेनदेन का पता लगाने और डिजिटल साक्ष्य को सुरक्षित करने जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर चर्चा की गई, जो तस्करी नेटवर्क को नष्ट करने में आवश्यक हैं।

यह सम्मेलन मुंबई के फोर्ट में हुआ और इसमें उप पुलिस अधीक्षक रैंक के एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTUs) के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। इस सभा का उद्देश्य कानून प्रवर्तन कर्मियों को साइबर फॉरेंसिक्स का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना था। पुलिस निरीक्षक जयवंत जाधव और कृष्णकुमार खंडेलवाल ने प्रशिक्षण सत्रों का नेतृत्व किया, जिसमें डिजिटल साक्ष्य को संभालने के दौरान कानूनी प्रावधानों का पालन करने के महत्व पर जोर दिया गया।

सत्रों के दौरान, प्रतिभागियों को साइबर फॉरेंसिक्स के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित किया गया, जिसमें डिजिटल पदचिह्नों का विश्लेषण और तस्करी गतिविधियों से जुड़े भुगतान के रास्तों का पता लगाना शामिल था। ये कौशल अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि तस्कर अक्सर उन्नत ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से काम करते हैं, जिससे पारंपरिक जांच विधियाँ कम प्रभावी हो जाती हैं।

इस सम्मेलन के प्रभाव तत्काल कानून प्रवर्तन प्रथाओं से परे हैं। AHTUs की क्षमताओं को बढ़ाकर, महाराष्ट्र पुलिस मानव तस्करी से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा बनाने का लक्ष्य रखती है, जो राज्य में एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। उनके संचालन में साइबर फॉरेंसिक्स का एकीकरण अधिक प्रभावी हस्तक्षेप और अभियोजन की संभावना को बढ़ाने की उम्मीद है।

आगे देखते हुए, महाराष्ट्र पुलिस भविष्य के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में साइबर फॉरेंसिक्स पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है। जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी विकसित होती है, तस्करों द्वारा उपयोग किए जाने वाले तरीके भी विकसित होते हैं, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के भीतर निरंतर शिक्षा और अनुकूलन की आवश्यकता होती है। अगले कदमों में आगे के कार्यशालाएँ और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सहयोगात्मक प्रयास शामिल होंगे ताकि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में आगे बढ़ा जा सके।

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