महाराष्ट्र MLC चुनाव: BJP और शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप

MLC चुनाव परिणामों के बाद, BJP और शिवसेना ने एक-दूसरे पर गलतियों का आरोप लगाया।

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Aapla Nagpur Desk
29 Oct 2026, 12:46 PM IST · 2 मिनट वाचन
Source: The Hindu
महाराष्ट्र MLC चुनाव: BJP और शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप
खास बातें
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BJP और शिवसेना ने मिलकर तीन में से केवल दो MLC सीटें जीतीं।

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NCP ने अपनी एकमात्र सीट खो दी, जबकि कांग्रेस ने नागपुर सीट बरकरार रखी।

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दोनों पार्टियों का कहना है कि बेहतर समन्वय से सभी सीटें जीती जा सकती थीं।

29 अक्टूबर 2026 को हुए महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों के परिणामों के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। महायुति नामक सत्तारूढ़ गठबंधन केवल पांच में से दो सीटें ही जीत सका, जिसमें BJP और शिवसेना ने एक-एक सीट जीती, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अपनी एकमात्र सीट खो बैठी।

BJP ने शिवसेना पर आरोप लगाया कि उसने अपने स्वार्थ को गठबंधन के हितों पर प्राथमिकता दी, जिसके कारण तीन सीटों का नुकसान हुआ। BJP के प्रवक्ता नवनाथ बान ने कहा कि सीटों के बंटवारे में समन्वय की कमी स्पष्ट थी, विशेष रूप से पुणे में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के लिए शिवसेना के अंतिम समय में समर्थन देने के कारण। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि शिवसेना ने बेहतर सहयोग किया होता, तो गठबंधन सभी पांच सीटें जीत सकता था।

इसके जवाब में, शिवसेना के नेताओं ने BJP के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि BJP ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान उचित समन्वय बनाए रखने में विफलता दिखाई। शिवसेना के नेता आनंद परांजपे ने BJP की सीटों के असमान वितरण की आलोचना की और कहा कि कई BJP नेता अपने सहयोगियों के लिए सक्रिय रूप से समर्थन नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुणे में सीटों पर BJP का एकाधिकार गठबंधन की सफलता के लिए हानिकारक था।

चुनावी परिणाम महायुति गठबंधन और महाराष्ट्र की राजनीति में इसके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। NCP और कांग्रेस के मजबूत होने के साथ, BJP और शिवसेना को आगे की रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। शिवसेना के स्वतंत्र उम्मीदवारों का समर्थन और BJP के आंतरिक विरोध ने गठबंधन की स्थिरता पर सवाल उठाए हैं।

आगे देखते हुए, दोनों पार्टियों को आत्ममंथन करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता होगी ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके। आगामी चुनावी चुनौतियाँ महायुति गठबंधन की मजबूती का परीक्षण करेंगी, और दोनों पार्टियों को मिलकर काम करना होगा ताकि वे खोई हुई जमीन को फिर से हासिल कर सकें।

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