नाना पाटेकर का 76 वर्ष की आयु में निधन, दिल का दौरा पड़ा
प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया, कुछ महीने पहले उन्होंने दिल की सेहत के बारे में अपनी चिंताओं को व्यक्त किया था।
नाना पाटेकर का गोवा में 76 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
उन्होंने नागपुर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिल के दौरे के बारे में अपनी चिंताएँ व्यक्त की थीं।
पाटेकर 'नटसम्राट' नाटक के फिल्म रूपांतरण में अपने किरदार के लिए जाने जाते थे।
प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का 76 वर्ष की आयु में गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यह घटना गुरुवार की सुबह हुई, जब उन्हें उनके अपार्टमेंट में बेहोश पाया गया। तत्काल चिकित्सा सहायता के बावजूद, 45 मिनट की निरंतर सीपीआर के बाद भी डॉक्टर उन्हें पुनर्जीवित नहीं कर सके और सुबह 5:10 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
इस वर्ष 18 मई को, पाटेकर ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान दिल के दौरे के बारे में अपनी चिंताओं को साझा किया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया था, जो जल संरक्षण संगठन की 25वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहे थे। पाटेकर ने कहा कि दिल के दौरे के डर के कारण उन्होंने 'नटसम्राट' नाटक में प्रदर्शन नहीं किया।
पाटेकर के एक करीबी मित्र ने बताया कि अभिनेता ने सुबह 3:30 बजे एक संदेश भेजा था कि वह ठीक महसूस नहीं कर रहे हैं। जब मित्र ने यह संदेश देखा, तो वह तुरंत उनके अपार्टमेंट पहुंचे, जहां उन्होंने पाटेकर को गंभीर स्थिति में पाया। एंबुलेंस को बुलाया गया और तुरंत उपचार शुरू किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अभिनेता का शव गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में पोस्ट-मॉर्टम के लिए भेजा गया है ताकि मृत्यु का सही कारण पता लगाया जा सके। पाटेकर का निधन भारतीय फिल्म उद्योग में एक महत्वपूर्ण शून्य छोड़ गया है, खासकर उनके प्रशंसकों और सहकर्मियों के बीच जिन्होंने उनके काम और योगदान की सराहना की।
आगे देखते हुए, फिल्म समुदाय पाटेकर की विरासत को श्रद्धांजलि देने की उम्मीद कर रहा है, विशेष रूप से उनके प्रभावशाली प्रदर्शन को उजागर करते हुए, जिसमें 2016 में 'नटसम्राट' के फिल्म रूपांतरण में उनका किरदार शामिल है। उनके द्वारा किए गए स्वास्थ्य संबंधी विचार और कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर उनकी खुली चर्चा भविष्य में प्रदर्शन कला के दबावों पर चर्चा में गूंजती रहेगी।



