नागपुर में वकीलों और छात्रों का प्रदर्शन, सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ
नागपुर में प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में हुए массов गिरफ्तारी के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
वकील और छात्र दिल्ली में हुई गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र में असहमति के महत्व पर जोर दिया।
प्रदर्शन का उद्देश्य कानूनी अधिकारों का समर्थन और सरकारी कार्रवाई की निंदा करना है।
12 अक्टूबर 2023 को, नागपुर में वकीलों और छात्रों ने दिल्ली में हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई массов गिरफ्तारी के खिलाफ अलग-अलग प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ शुरू हुए, जिसमें आरोप लगाया गया कि लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे व्यक्तियों को अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया।
नागपुर में वकीलों ने नागपुर जिला और सत्र न्यायालय के चारों ओर एकत्रित होकर अपने दिल्ली के समकक्षों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने केंद्रीय सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की, यह बताते हुए कि नागरिकों को विरोध करने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।
राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) और अखिल भारतीय छात्र महासंघ (AISF) के छात्रों ने भी सम्विधान चौक पर प्रदर्शन किया। उन्होंने दिल्ली में छात्रों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे में चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि राष्ट्रीय माहौल तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। उनका भागीदारी लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली और नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर करती है।
जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता रोशन बागडे ने कहा कि यह प्रदर्शन दिल्ली में हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन करने और वकीलों के खिलाफ की गई कार्रवाई की निंदा करने के लिए आयोजित किया गया था। नागपुर में हुए ये प्रदर्शन वर्तमान राजनीतिक माहौल में बढ़ती असंतोष को दर्शाते हैं।
आगे देखते हुए, कानूनी समुदाय और छात्र संगठन अपने वकालत प्रयासों को जारी रखने की योजना बना रहे हैं, लोकतांत्रिक परंपराओं और कानून के शासन को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए। भविष्य में और प्रदर्शन आयोजित किए जा सकते हैं ताकि सरकार पर दबाव बनाए रखा जा सके और असहमति की आवाजों को सुना और सम्मानित किया जा सके।



