बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपराध स्थल निरीक्षण के अनुरोध को खारिज किया
नागपुर बेंच ने आरोपी के अपराध स्थल निरीक्षण के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट की विवेकाधीनता पर जोर दिया।
आरोपी का अपराध स्थल निरीक्षण का अनुरोध हाईकोर्ट ने खारिज किया।
निरीक्षण का निर्णय ट्रायल कोर्ट की विवेकाधीनता में है।
घटना 2022-23 की है, निरीक्षण का अनुरोध जून 2026 में किया गया।
नागपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि आरोपी को अपराध स्थल का निरीक्षण करने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय इस बात पर जोर देता है कि ऐसे निरीक्षण की आवश्यकता का निर्णय केवल ट्रायल कोर्ट के पास है। यह निर्णय एक शिक्षक द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में आया है, जिसे एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न का आरोपी बनाया गया है, जिसने स्कूल के विज्ञान प्रयोगशाला का निरीक्षण करने की अनुमति मांगी थी जहां कथित घटना हुई थी।
शिक्षक की याचिका को ट्रायल कोर्ट ने 24 जुलाई को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि प्रयोगशाला का आकार और लेआउट यह दर्शाता है कि वहां उत्पीड़न नहीं हो सकता था। हालांकि, न्यायमूर्ति मेहरोज़ पठान ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के लिए अनुरोध केवल अभियोजन द्वारा तैयार किए गए 'स्पॉट पंचनामा' का विरोध करने के लिए नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि सात अभियोजन गवाहों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके थे, और पंचनामा के समय उपस्थित गवाह का क्रॉस-एक्जामिनेशन किया गया था। इसके अलावा, पीड़िता से प्रयोगशाला के आकार और संरचना के बारे में सवाल पूछा गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पहले से ही पर्याप्त सबूत उपलब्ध हैं।
कोर्ट ने यह भी बताया कि कथित घटना 2022-23 के बीच हुई थी, जबकि निरीक्षण का अनुरोध जून 2026 में किया गया था, जिससे ट्रायल प्रक्रिया में संभावित देरी का संकेत मिलता है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया।
यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि ट्रायल कोर्ट के पास सबूतों के निरीक्षण की प्रासंगिकता और आवश्यकता का निर्णय लेने का विवेकाधिकार होता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता बनी रहती है। यह निर्णय समान मामलों के लिए व्यापक प्रभाव डाल सकता है, समय पर कानूनी कार्यवाही और निरीक्षण के लिए पर्याप्त सबूत की आवश्यकता पर जोर देता है।


