अमेरिका के ग्रीन-कार्ड कार्यक्रम की निलंबन: भारतीय श्रमिकों पर प्रभाव
PERM प्रक्रिया के हालिया निलंबन ने अमेरिका में भारतीय तकनीकी पेशेवरों को प्रभावित किया है, जिससे उनकी निवास स्थिति और वित्तीय दायित्वों के बारे में चिंताएँ बढ़ गई हैं।
ट्रंप प्रशासन ने कई प्रमुख तकनीकी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया, जिससे ग्रीन-कार्ड आवेदनों पर असर पड़ा।
H-1B वीजा पर भारतीय श्रमिकों को स्थायी निवास प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत लौटने पर अमेरिकी रिटायरमेंट खातों, कर दायित्वों और संपत्ति निवेशों का प्रबंधन करना आवश्यक है।
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कई तकनीकी कंपनियों, जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट और इन्फोसिस, को अमेरिका के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) से निलंबित कर दिया है। यह कार्यक्रम विदेशी श्रमिकों को स्थायी निवास के लिए प्रायोजित करने में नियोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह निलंबन मौजूदा H-1B वीजा को स्वचालित रूप से रद्द नहीं करता, लेकिन यह प्रभावित श्रमिकों के ग्रीन-कार्ड आवेदन प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है।
कानूनी विशेषज्ञ सिद्धार्थ बत्रा के अनुसार, PERM प्रक्रिया उन कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है जो अस्थायी से स्थायी निवास की ओर बढ़ रहे हैं। यह निलंबन मुख्य रूप से H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए स्थायी निवास के रास्ते को प्रभावित करता है। इसके दीर्घकालिक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि अमेरिकी सरकार प्रभावित आवेदनों का प्रबंधन कैसे करती है और निलंबन की अवधि कितनी लंबी होती है।
H-1B वीजा धारकों को अमेरिका में अधिकतम छह वर्षों तक रहने की अनुमति है, जिसमें तीन वर्षों की प्रारंभिक अवधि और तीन वर्षों का विस्तार शामिल है। यदि निलंबन के कारण श्रमिकों को भारत लौटना पड़ता है, तो उन्हें अपने अमेरिकी रिटायरमेंट खातों, कर दायित्वों और संपत्ति निवेशों का प्रबंधन करना होगा। SKV लॉ ऑफिसेज के वरिष्ठ सहयोगी करण जायसवाल का कहना है कि अमेरिका छोड़ने से 401(k) रिटायरमेंट खाते को बंद करने की आवश्यकता नहीं होती है। वे या तो नियोक्ता की योजना में अपने पैसे को रख सकते हैं या इसे व्यक्तिगत रिटायरमेंट खाते (IRA) में स्थानांतरित कर सकते हैं।
इसके अलावा, भारत लौटने वाले व्यक्तियों को अपने अमेरिकी वित्तीय संपत्तियों, जैसे कि बैंक जमा, शेयर और रियल एस्टेट का ध्यान रखना होगा। जबकि वे इन संपत्तियों के मालिक बने रह सकते हैं, अमेरिकी कर नियमों और दस्तावेज़ीकरण आवश्यकताओं का पालन करना महत्वपूर्ण है। कानूनी विशेषज्ञ तुषार अग्रवाल का कहना है कि किराए की आय और संपत्ति कर स्थानांतरण के साथ समाप्त नहीं होते हैं, इसलिए व्यक्तियों को स्थानांतरण से पहले अपने वित्तीय दस्तावेजों को नियमित करना चाहिए।
जैसे-जैसे स्थिति विकसित होती है, भारतीय तकनीकी पेशेवरों को PERM निलंबन के प्रभावों के बारे में जागरूक रहना चाहिए और अपने निवास स्थिति और वित्तीय दायित्वों में संभावित परिवर्तनों के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके ग्रीन-कार्ड आवेदनों और अमेरिकी संपत्तियों के प्रबंधन का भविष्य आने वाले महीनों में अमेरिकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर निर्भर करेगा।

