आरबीआई की एमपीसी ने महंगाई के खतरे के बीच रेपो दर बढ़ाई
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई के बढ़ते खतरे के कारण रेपो दर को 5.50% तक बढ़ा दिया है।
एमपीसी ने रेपो दर को 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 5.50% किया।
महंगाई अगले तीन तिमाहियों में औसतन 5.8% रहने का अनुमान।
महंगाई पर आपूर्ति पक्ष के दबाव और मजबूत क्रेडिट वृद्धि का प्रभाव।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 5 से 7 अक्टूबर के बीच बैठक की और रेपो दर को 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 5.50% करने का निर्णय लिया। यह निर्णय महंगाई के बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है, खासकर जब इनपुट लागत बढ़ रही है और क्रेडिट वृद्धि मजबूत बनी हुई है। एमपीसी की बैठक के मिनट्स में महंगाई की अपेक्षाओं में वृद्धि और अर्थव्यवस्था में व्यापक महंगाई के संभावित दबावों का संकेत दिया गया है।
ऐतिहासिक रूप से, एमपीसी महंगाई के रुझानों पर नजर रखता आया है, और हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में 4% से अधिक महंगाई वाले सामानों का हिस्सा अगस्त में 37% तक बढ़ गया, जो मार्च में केवल 20% था। कोर महंगाई दर, जो खाद्य और ईंधन को छोड़कर मापी जाती है, में भी वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि अंतर्निहित महंगाई के दबाव अधिक स्पष्ट हो रहे हैं।
एमपीसी की चर्चाओं से प्राप्त प्रमुख आंकड़े बताते हैं कि महंगाई अगले तीन तिमाहियों में औसतन 5.8% रहने का अनुमान है, जबकि दिसंबर तिमाही में 6% सीपीआई महंगाई दर की उम्मीद है। इसके अलावा, कोर महंगाई 2026-27 तक 4.4% तक पहुँचने की संभावना है। एमपीसी के सदस्य सॉगता भट्टाचार्य ने पिछले नीति समीक्षा के बाद महंगाई के लिए ऊपर की ओर जोखिमों के उभरने का उल्लेख किया, जिसमें थोक मूल्य सूचकांक में इनपुट लागत लगभग 9% सालाना के करीब है।
इन महंगाई के रुझानों के व्यापक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव हैं। एमपीसी का मौद्रिक नीति को कड़ा करने का निर्णय संभावित महंगाई के दबावों को कम करने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है। आपूर्ति पक्ष के दबाव और मजबूत क्रेडिट वृद्धि के संयोजन से व्यापक महंगाई की संभावना है, जो उपभोक्ताओं और व्यवसायों दोनों को प्रभावित कर सकती है। समिति का सर्वसम्मति से रेपो दर को समायोजित करने का निर्णय इन चुनौतियों का समाधान करने की तात्कालिकता को दर्शाता है।
आगे देखते हुए, एमपीसी महंगाई के आंकड़ों की बारीकी से निगरानी करने के लिए तैयार है, क्योंकि वर्तमान दर वृद्धि चक्र की अवधि और सीमा महंगाई के विकास पर निर्भर करेगी। समिति की स्थिति अब तटस्थ से समायोजित कड़ाई में बदल गई है, जो महंगाई के संकेतों के प्रति पूर्व-emptive कार्रवाई करने की तत्परता को दर्शाती है। भविष्य की नीति कार्रवाई महंगाई के प्रसार और संभावित दूसरे दौर के प्रभावों के संबंध में आने वाले आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
