आरबीआई ने महंगाई के बीच रेपो दर 5.5% बढ़ाई

आरबीआई ने महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच रेपो दर को 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 5.5% किया है।

A
Aapla Nagpur Desk
7 Oct 2026, 10:03 AM IST · 2 मिनट वाचन
Source: NDTV
आरबीआई ने महंगाई के बीच रेपो दर 5.5% बढ़ाई
खास बातें
1

रेपो दर को 5.25% से बढ़ाकर 5.5% किया गया है।

2

आरबीआई ने 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' की नीति अपनाई है।

3

जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.1% बढ़ा दिया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच रेपो दर को 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 5.5% करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में लिया गया, जो फरवरी 2023 के बाद से पहली बार दर में वृद्धि है। यह निर्णय महंगाई, बढ़ती तेल की कीमतों और कमजोर रुपये की पृष्ठभूमि में लिया गया है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वैश्विक महंगाई के रुझानों और व्यापार में अनिश्चितताओं पर चिंता व्यक्त की गई। मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक भावना कमजोर बनी हुई है और ईरान युद्ध के प्रभाव से व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और निकट भविष्य में दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है।

आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति की स्थिति को 'न्यूट्रल' से 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदल दिया है, जो एक सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस बदलाव का मतलब है कि आरबीआई महंगाई के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, आरबीआई ने इस वित्तीय वर्ष के लिए अपनी मुख्य महंगाई पूर्वानुमान को 4.4% से बढ़ाकर 4.3% कर दिया है।

इस दर वृद्धि के साथ, आरबीआई ने इस वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 7.1% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि आर्थिक गतिविधियाँ दूसरे तिमाही में स्थिर बनी हुई हैं, जबकि विनिर्माण और सेवाओं के क्षेत्र में स्थिरता देखी गई है। हालांकि, आरबीआई ने गैर-स्थायी वस्तुओं और घरेलू हवाई यातायात में कमजोरी की ओर भी इशारा किया है।

आगे देखते हुए, विशेषज्ञों ने संतुलित मौद्रिक नीति के महत्व पर जोर दिया है। एचएनजीआईएल के मुख्य रणनीति अधिकारी सुरज मेहता ने कहा कि महंगाई के संदर्भ में 25 आधार अंकों की वृद्धि समझ में आती है, लेकिन यह पहले से ही उच्च ऊर्जा और इनपुट लागत का सामना कर रहे निर्माताओं के लिए पूंजी की लागत को थोड़ा बढ़ा सकती है। औद्योगिक निवेश और विकास की गति बनाए रखने के लिए आपूर्ति-पक्ष बाधाओं को कम करने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।

💬इस खबर पर आपकी क्या राय है?आपकी राय क्या है?

आगे पढ़ें