5 नवंबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में 9% गिरावट से भारतीय बाजारों में तेजी
भारतीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के प्रभाव से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें $93.82 प्रति बैरल तक गिर गईं, जो 9% की कमी दर्शाती है।
निफ्टी 50 में 440 अंकों की वृद्धि हुई, जबकि सेंसेक्स में 1,544 अंकों की बढ़ोतरी हुई।
भारतीय रुपया दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, जबकि डॉलर की कीमत में गिरावट आई।
5 नवंबर 2026 को, भारतीय वित्तीय बाजारों ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 9% की गिरावट के बाद महत्वपूर्ण लाभ दर्ज किया। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें $93.82 प्रति बैरल तक गिर गईं, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रभाव था। यह गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन आई है, जिसने भारत में निवेशकों के मनोबल को बढ़ाया।
भारतीय शेयर बाजारों ने तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब खुला, जिसमें निफ्टी 50 में 440 अंकों, यानी 1.8% की वृद्धि हुई, और यह 24,400 पर पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 2% बढ़कर 78,845 पर पहुंच गया, जो 1,544 अंकों की वृद्धि दर्शाता है। विश्लेषकों ने बताया कि वैश्विक तेल की कीमतों में कमी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया घटनाक्रमों ने बाजारों को स्थिरता प्रदान की। ईरानी अधिकारियों ने भारतीय जहाजों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में प्रतिबंधों से छूट देने की घोषणा की, जिससे बाजार की स्थिति और मजबूत हुई।
इसके अतिरिक्त, भारतीय रुपया दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जब यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.38 पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद से 0.15% की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से समर्थित थी, जिसने पहले मुद्रा पर दबाव डाला था। हालांकि, आयातकों से डॉलर की मांग ने रुपये की वृद्धि को सीमित किया। डॉलर इंडेक्स भी अमेरिकी चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद एक महीने के निचले स्तर पर गिर गया।
इन घटनाक्रमों के प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में कमी महंगाई के दबाव को कम कर सकती है और व्यापार संतुलन में सुधार कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट उपभोक्ताओं और व्यवसायों को राहत देने की उम्मीद है, जिससे आने वाले महीनों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिल सकता है। बाजार विश्लेषक भारतीय शेयरों में निरंतर तेजी की उम्मीद कर रहे हैं, बशर्ते वैश्विक तेल की कीमतें स्थिर रहें।
आगे देखते हुए, निवेशक अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य में आगे के विकास पर नजर रखेंगे और उनके वैश्विक बाजारों पर संभावित प्रभाव का आकलन करेंगे। आगामी सत्रों में व्यापारियों की प्रतिक्रियाओं के अनुसार निरंतर अस्थिरता देखने की संभावना है।

