सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर निर्यात शुल्क में बदलाव किया
हालिया समीक्षा में सरकार ने पेट्रोल का निर्यात शुल्क बढ़ाया और डीजल का शुल्क घटाया, जो 16 अक्टूबर से लागू होगा।
पेट्रोल निर्यात शुल्क बढ़कर ₹2.5 प्रति लीटर हुआ।
डीजल निर्यात शुल्क घटकर ₹8.5 प्रति लीटर हुआ।
घरेलू ईंधन शुल्क या एटीएफ शुल्क में कोई बदलाव नहीं।
भारत सरकार ने हाल ही में अपनी द्वि-साप्ताहिक समीक्षा में पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क में बदलाव की घोषणा की है। यह बदलाव 16 अक्टूबर से प्रभावी होगा, जिसमें पेट्रोल का निर्यात शुल्क ₹0.5 से बढ़ाकर ₹2.5 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल का शुल्क ₹16 से घटाकर ₹8.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। एटीएफ पर शुल्क ₹10.5 प्रति लीटर पर अपरिवर्तित है।
यह निर्यात शुल्क में बदलाव घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। सरकार ने 27 मार्च से इन शुल्कों की द्वि-साप्ताहिक समीक्षा शुरू की है, जिसमें कच्चे तेल और परिष्कृत उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखा जाता है। इसका उद्देश्य निर्यात प्रोत्साहनों को घरेलू ईंधन की उपलब्धता के साथ संतुलित करना है।
पेट्रोल पर शुल्क बढ़ाने और डीजल पर शुल्क घटाने का निर्णय सरकार की रणनीति को दर्शाता है, जो पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईंधन निर्यात को प्रबंधित करने के लिए है। इन शुल्कों में बदलाव के माध्यम से, सरकार अत्यधिक निर्यात को हतोत्साहित करना चाहती है, जिससे स्थानीय ईंधन की कीमतों और उपलब्धता पर प्रभाव पड़ सकता है।
इन परिवर्तनों के प्रभाव उपभोक्ताओं और तेल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं। जबकि पेट्रोल शुल्क में वृद्धि निर्यातकों के लिए लागत बढ़ा सकती है, डीजल शुल्क में कमी अधिक डीजल निर्यात को प्रोत्साहित कर सकती है, जिससे घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। एटीएफ शुल्क में कोई बदलाव नहीं होने से विमानन ईंधन के प्रति स्थिर दृष्टिकोण का संकेत मिलता है।
आगे देखते हुए, सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और घरेलू ईंधन की आवश्यकताओं की निगरानी जारी रखेगी, और अगले दो सप्ताह में अगली समीक्षा की जाएगी। तेल और गैस क्षेत्र के हितधारकों को इन परिवर्तनों के बारे में सूचित रहना चाहिए, क्योंकि यह निकट भविष्य में मूल्य निर्धारण रणनीतियों और निर्यात निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।



