विदेशी निवेशकों ने भारतीय आईपीओ में $1 बिलियन का निवेश किया
शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक सितंबर में अकेले $1 बिलियन का आईपीओ में निवेश कर रहे हैं।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में $4.8 बिलियन के शेयर बेचे और आईपीओ में $1 बिलियन का निवेश किया।
रिटेल निवेशकों ने आईपीओ में Rs 12,618 करोड़ का निवेश किया, जबकि पहले के महीनों में शेयर बेचे।
बाजार विशेषज्ञ वर्तमान अस्थिरता के बावजूद भारतीय शेयरों के लिए सकारात्मक दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाए रखते हैं।
भारतीय शेयर बाजार वर्तमान में एक महत्वपूर्ण गिरावट का सामना कर रहा है, जिसमें सेंसेक्स इंडेक्स अपने सर्वकालिक उच्च से लगभग 16% गिर गया है। इस गिरावट ने भारतीय शेयरों से विदेशी निवेशकों के एक महत्वपूर्ण निकासी को प्रेरित किया है, जिससे रिकॉर्ड बहिर्वाह हुआ है। सितंबर में, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सूचीबद्ध शेयरों में $4.8 बिलियन की बिक्री की, जो अप्रैल 2026 के बाद से सबसे उच्च मासिक बहिर्वाह है। हालांकि, प्राथमिक बाजार में, विशेष रूप से प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकशों (IPOs) के साथ, एक विपरीत कहानी सामने आ रही है।
आश्चर्यजनक रूप से, FPIs ने सितंबर में आईपीओ में $1 बिलियन का निवेश किया, जो नए प्रस्तावों में मजबूत रुचि को दर्शाता है, जबकि वे स्थापित शेयरों से निकासी कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति एक महीने तक सीमित नहीं है; 2026 के पहले नौ महीनों में, FPIs ने आईपीओ में $5.9 बिलियन का निवेश किया, जबकि सूचीबद्ध शेयरों से $33.7 बिलियन की निकासी की। रिटेल निवेशक भी इसी तरह की प्रवृत्ति का पालन कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले महीनों में Rs 5,674 करोड़ की बिक्री के बाद आईपीओ में Rs 12,618 करोड़ का निवेश किया।
आईपीओ में निवेश में वृद्धि के कई कारण हैं, जिनमें नए प्रस्तावों में अनुकूल मूल्यांकन और विकास की संभावना शामिल है। बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि यह वर्तमान बदलाव एक रणनीतिक संपत्ति पुनर्वितरण को दर्शाता है, जिसमें निवेशक आईपीओ में अवसरों की तलाश कर रहे हैं जो परिपक्व, पूरी तरह से मूल्यांकित शेयरों की तुलना में बेहतर प्रवेश बिंदु प्रदान कर सकते हैं। मोटिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की स्नेहा पोद्दार के अनुसार, द्वितीयक बाजार में ऊंचे मूल्यांकन ने विदेशी और घरेलू निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया है।
इस प्रवृत्ति के प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। जबकि शेयर बाजार चुनौतियों का सामना कर रहा है, आईपीओ में मजबूत रुचि निवेश के लिए विकास उन्मुख अवसरों की निरंतर भूख को दर्शाती है। यह बदलाव भारतीय बाजार की बुनियादी बातों में व्यापक विश्वास का संकेत दे सकता है, भले ही तत्काल अस्थिरता हो। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक बाजार निवेशकों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभर सकता है, जो उभरते व्यापार मॉडल और क्षेत्रों में पूंजीकरण करना चाहते हैं, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा में।
आगे देखते हुए, बाजार विश्लेषक भारतीय शेयर बाजार के लिए एक सतर्क आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखते हैं। जबकि वैश्विक आर्थिक कारकों के कारण अल्पकालिक अस्थिरता की उम्मीद है, अंतर्निहित घरेलू बुनियादी बातें मजबूत बनी हुई हैं। FY27 के लिए 7.1% की जीडीपी वृद्धि की भविष्यवाणी के साथ और आय में steady recovery के साथ, निवेशकों को दीर्घकालिक विकास के अवसरों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान बाजार की स्थिति गुणवत्ता वाले शेयरों में रणनीतिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर सकती है क्योंकि मूल्यांकन अधिक उचित हो रहे हैं।